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जो सृष्टि के कर्ता- धरता
उनके कर तू क्या हरता
जो ब्रह्माण्ड के पालनहारे
तू क्या उनके शीश उतारे
क्षणभंगुर है तेरा जीवन
करता क्या प्रतिमाओं का खण्डन
मूढ़मते तू कुछ नहीं जाने
नारायण महिमा ना पहचाने
वो थामे हैं तेरी जीवन डोर
तभी मूर्तियां रहा तोड़