इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश '#ग़ालिब',
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे ॥

3 11

ہو چکیں غالبؔ بلائیں سب تمام
ایک مرگ ناگہانی اور ہے

हो चुकीं ग़ालिब बलाएं सब तमाम
एक मर्ग -ए -नागहानी और है

{ O Ghalib ,every calamity has fallen upon us
What is now left is just a sudden death }



(Painting /Portrait of Mirza Ghalib by M F Hussain )

21 74